1. काला रंग

 बहुत खुशनुमा मौसम होली का रहता है लेकिन जब होली के शाम को ही घर का बड़ा बेटा अपनी परीक्षा देने के लिए जाना चाहे तो मां अनायास ही रोने लगती है, कुछ ऐसा ही माहौल कुछ घर का था। लेकिन अब पेपर है तो जाना ही पड़ेगा;खैर होली काफी शानदार ढंग से खेला गया और वह लड़का अपना सामान लेकर निकल गया।

लेकिन ईश्वर भी कितना निराला है कि न हम आने वाली खुशी के बारे में जान सकते है और न ही आने वाले दुख के बारे में; अगर कुछ ऐसा होता की हम बहुत सुखी है और कोई हमे बता दे कि जो तुम खुश हो रहे हो बस दुख आ ही रहा है और तुम्हारी खुशी लेकर चला जायेगा ठीक वैसे ही दुख के साथ भी है;अगर कोई जान ले कि बस सुख आने ही वाला है तो दुख और आसान हो जायेगा
लेकिन व्यवस्था कितनी शानदार है कि हम दोनो में से किसी को भी जान नही सकते है। शायद इसी कारण संतुलन बना हुआ ।
लड़का परीक्षा देने गया लेकिन कभी लौटा ही नही : अब आप जरा सोचिए की क्या उसके घर वालो ने कभी ये सोचा होगा कि उनकी उससे आखिरी मुलाकात है,नही।
जीवन में कुछ ऐसा ही है कि हमे आगे क्या होगा हम कुछ जान नही सकते है ,फिर जब ये सब देखने के बाद लगता है कि हम जब कुछ जान ही नहीं सकते तो किस बात का घमंड रखते है ।


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